Group Sex Stories : सामूहिक चुदाई की कहानियाँ – ग्रुप सेक्स स्टोरी

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Group Sex Stories

उमा एक बेहत ही खुशमिजाज शर्मीली और बदन ए खुब लडकी थी।जो उसे देखता बस देखता रह जाता।उमा एक बडे परिवार से थी।उसको घर से बाहर निकलने कि परमीट नही थी।बस अपने परिवारवालो के साथ ही कही आ-जा सकती थी।वही पर भी उसके साथ बहोत सारे बाॅडीबिल्डर रहते थे उसकी निगरानी करने।उसके लिए ये सब नया नही था लेकिन कुछ दिनी से उसको यह सब बकवास लगने लगा।

उमा अब जवान हो गई थी।उसकी काफी सारी सहेलीया जो एकदम बिंदास और ऐटम की तराह रहती थी।उनको पुरी छुट थी कही भी आने जाने को लेकिन उमा ऐसा नही कर सकती उसके घर वाले बहोत रहीस मिजाज वाले थे।

उमा अपनी सहेलियों से मिलने उनके काॅफी शाॅप पर चली गई।वहाॅ सभी बाॅडी गार्ड शाॅप के बाहर पहरा लगाकर खडे हो गऐ।अब सहेलियां अपनी अपनी कहानी सुनाने लग गई ।सब लडकियोंके बाॅयफ्रेंड थे लेकिन उसका कोई बाॅयफ्रैंड नही था।सभी सहेलिया उसकी शादी कि बात छेडते क्योकि वोह उसपर दुःख जताया करती थी।सभी लडकियोंने उन्होंने अपने अपने बाॅयफ्रेंड के साथ क्या क्या किया सब गप्पे लडाने मे मशगुल थी।उमा का चेहरा तो फिका पड गया।वोह उनकी बाते सुन मायुस हो गई।कुछ देर वहाॅ बैठी रही और फिर गुस्से मे वहाॅ से चली गई।

अपनी गाडी मै बैठकर जाते वक्त वोह गौर कर रही थी अपनी सहेलियों कि बिंदास जवानी भरी जवान बातो का।उसका गुसा उतरा नही था लेकिन कुछ देर बात उसे सडक के किनारे एक जादूगार मिला जो लव प्रोबलेम सोल्व करने का दावा करता था।

उसके पास बहोत सारी मनचाही चिज हासील करने का मंञ था।

उसने गाडी रोकने को कहाॅ।वोह उतरकर उसके पास गई।उमा जादुगार के सामने ठाण मांडकर बैठ गई जादुगार देखकर बोल तुम्हारा नाम उमा है।तुम्हारे पास बहोत सारे फ्रेंड है लेकिन तुम्हारा मन कही और लगा हुआ है।तुम अपनी मन की इच्छा पुरी करनी चाहती हो और वोह भी अपने हिसाब से।बस कमी कुछ नही लेकिन तुम्हें आझादी नहीं है अपने मन को तन को जहाॅ चाहे वहाॅ ईस्तमाल करने की।

उमा ने को यह बाते बडी सच्ची लगी।वोह उसके सारे दुख बताये जा रहा था और वोह एक अनपढ कि तराह सुन रही थी।यह बाते उसके पल्ले पड रही थी लेकिन उसका हल नही हो पा रहा था।

उमा थोडा रोने लग गई।जादुगारने उसनै आसु पोंछे और उसका हाथ पकडा और कहाॅ बेटी तुम तो बहोत खुशनशीब हो जो तुम्हे ईतनी शोहरत नशीब हुई है।बस ईसे अपनी मन मर्जी से नही लोगो कि हमदर्दी कि जरूरत है लाकिन दुनिया बडी अजीब है यहाॅ बहोत गरीब है।हर चेहरा दिखता शरीफ है लेकिन उसके पिछे कि सचाई से यहाॅ नही कोई वाकिफ़ है।

उमा हस पडी फिर जादुगार ने उसका हाथ पकडकर उसे एक अंगुठी पहनाई और कहाॅ उमाजी तुम ईसे पहनकर रखा करो।

और कभी अकेलापन लगे तो ईस अंगुठी से तुम कुछ मांगा करो।यह तुम्हारी हर ख्वाईश पूरी कर देगी।
उमा मानने को तैयार नही थी।फिर भी जादुगार के कहने पर उसने पहन ली।

उसके सभी बाॅडी गार्ड दुर से यह सब देख रहे थे।

उमाने उसका यकीन नही किया और कुछ पैसै देकर चली गई।उसे देर हो रही थी।अब घर पोहचकर घरवालो को जवाब देना था।

ईसलिए उसने अपनी अंगुठी निकालकर पर्स मे रख दी।परिवार वाले राह देख रहे थे।

उमा के आने पर उन्होने उसे कई सवाल कियें उमाने उन्हे बता दिया कि सहेलियों के साथ रूकी थी ईसलिए देर हो गई।

उसका यकीन कर परिवालो के साथ खाना खाकर वोह सोने गई ।अब बेडरूम मे जाते ही उसने पर्स मे से

अंगुठी निकाली अपनी बेड पर लेटे लेटे वह सोच रही थी क्या यह जादु वादु सच हो सकता है।उसका मन नही मान रहा।

उने अंगुठी पहन ली और उसे देखती रह गई कुछ अजीब फिलींग आ रही थी।सांसे थोडी सी सहम गई थी।कुछ

असर नहीं हो रहा था उसी धडकन बढने लगी थी।कुछ देर सोच कर वह सो गई और आधी रात उसने उसे उसी जादुगार के पास पाया।

लेकिन जादुगार उसी जगाह से थोडा अंधेरे मे खडा था।

उमा सहमते वहाॅ गई।उसने उसे आवाज दी जादुगर मुड गया।उसके चेहरा पर कोई भाव नही थे थी एक हलकी सी स्माईल।

उमा खुदको उसके सामने देखकर बहोत खुश हो गई।

उसने जादुगार से बात करना शुरू किया

आप तो सच मे जादुगार निकले।आपकी दि गई अंगुठी देखो मुझे आपके पास ले आई।

मै आपके बारे मे ही सोच रही थी और लो सब वैसा ही हुआ मै आपके पास आ गई।

जादुगार अनजान नहीं था।उसने कहाॅ मै अपनी ताकद पर कभी शक नही करता। मै खुदपर भरोसा करता हुॅ।

जिन्हे मेरा यकीन नहीं होता वोह खुद अपने सवाल लिए मेरे पास आता है और लो तुम आ गई।

मै तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था।

उमा और कुछ बोल नही पा रही थी।उसने जादुगार के बहोत बहोत आभार प्रकट किये और उसके सामने खडी रही।

जादुगार पलटकर उसी अंधेरी रोशनी मे कही गायब हो गया।

उमा अपने घुटनेपर बैठ गई और यकीन करने लगी ईस हकीकत का जो कभी उसने ख्वाब मे भी नही देखी।

फिर वह अंगुठी के सहारे अपने घर वापस घर गई और रातभर आराम से सो गई।

सुबह देर से उठकर वह तैयार होकर अपनी सहेलियों से मिलने चली गई।

रास्ते मे जाते वक्त उसने देगा वोह जादुगार वहाँ नही था।वोह सोच मे पड गई कहाॅ गये होंगें जादुगार उसे
यह अनमोल तोहफा देकर।ज्याता ना सोचते हुए वोह अपनी सहेलियों के पास पोहच गई।सभी सहेलियां उसी काॅफी शाॅप मे बैठकर उसका इंतजार कर रही थी।उसके आने पर वह रोज कि तराह थोडी बदल गई थी।वोह सहेलियों से बात करने से कतरा रही थी।सहेलियोंने उससे उसका हाल पुछा लेकिन उसने कुछ बताया नही।
वोह चुपचाप अपनी काॅफी पीते बैठी।सभी लड़कियां हसकर अपनी अपनी-अपनी बाते कर रही थी।सबमे चाट चल रहा था।उमा अपनेही खयालो मे उनकी बाते सुनती बैठी थी।बहोत देर होने के बाद भी उमा वहाँ बैठी रही

सहेलियां अपना चॅट करना छोड शाॅप से चली गई।उमा वहाँ गुमसुम बैठी रही।तबी बांडीगार्ड ने आकर उसे होश मे लाया और लौट चलने को कहाँ।उमा उसके साथ चली गई।एक दिन रोज कि तराह वोह गहरी नींद मे थी और उसे ख्वाब आया अजीब सी दुनिया मे गई है।

जहाॅ सिर्फ मर्द रहते और किसी औरत का वहाँ होना किसी खञे कम नही वोह खतरा था उसकी उमलती जवानी।उसके रसभरे massive होंठ उसपर चढा गहरा magneta colour जिसे देखकर सभी मर्द उसकी तरफ एक मॅग्नेट कि तराह खिचे चले आते थे।और दोनो मै मैग्नीट्यूड तैयार हो जाता था।

उमा ईसी मैग्नीट्यूड कि शिकार रोज होती थी पर अब वोह यह खतरा मोड लेना चाहती थी।अपनी जिंदंगी मे बदलाव लाना चाहती थी।उमा को किसी मर्द के सहारे कि जरूरत मेहसुस हो रही थी ।

और कुछ देर मे जैसा उमा ने सोचा था वैसा ही हुआ।वोह उस दुनिया मै पोहच गई।जो उसने देखी थी।

वहाँ एक से बढकर एक मर्दों को टोली थी।वोह सोच भी नही सकती थी।ईतने खुखसुरत और तंदरुस्त पुरूष अपने जवान बदन को सहेज रहे थे।वोह एक मर्दो का काफीला था जिन्हें सिर्फ खाना पिना और अलग दनिया से आई इच्छाधारी हुस्न ए परी की सेवा करनी होती थी।अपनी हसीन जवानी उन लडकियों पर निछावर करनी होती थी जिसे जादुगार कि अंगुठी भेजती थी जश्न-ए-आज़ादी मनाने के लिए।

वहां सिर्फ धरती कि वोह हसीन परीया जाती है जिसके पास जादुगार अंगुटी होती है।और वहां के लोगो के बताने कि जरूरत नही होती कि कहाँ आई है।

उमा उस कबिले कि चल पडी।कुछ दुरी से देखा तो वहाॅ कुछ नौजवान लडके कसरत कर रहे थी सभी बहोत शानदार लिबास पहनकर उस जगह कोई लकडीया काट रहा है,कोई बाते करते खडे है और कुछ लडको को उसने उस कबीले कि शानदार घरो मे लड़कियो के साथ ज्याते देखा।

उमा वहाॅ गई और लडकोसे बात करने कि कोशीश कि लेकिन बात नही बनी।उमा दुसरे झुंड कि और गई लेकिन वहाॅ भी बात नही बनी।कुछ देर बात वहाॅ कबीले का मुखिया आया।उसने उमा को अपने पास बुलाया और पुछा आखीरकार तुम भी आ गई अपनी जवानी को ठंडी करवाने।यहाॅ वोह हर लडकी आती है जिसका मन पुरूषो से संबंध तो बनाना चाहता है।लेकिन अपने दिल मे दबाये रखती है,अंतरवासना अपनी।

उमा थोडी चौक गई।वोह ईन्कार करने लगी।वोह मुखिया से भी अपनी बात छुपाने लगी।मुखीया मन ही मन हसता उन शानदार घरो कि और चल निकला।उमा थोडी झिझकते हुए उसके पिछे चलने लगी।
मुखिया उस कि दरवाजे के पास आकर खडा हो गया और अंदर देखने लगा,उमा ने भी भितर झाँका वोह देखकर हैरान रह गई।

उसकी सभी सहेलिया उन कबीले के लडको से चुदवाकर ले रही थी।उसने एक एक कर सभी खोलीयी मे झांका सब जगाह चुदाई चल रही थी।उसकी ऐसी कोई सहेली नही बच्ची जो जिसने अपना कुवारा पन खोया न हो।सब सहेलिया चुदकड निकली।मुखीया ने फिर उसे समझाया और पुछा भी क्या तुम्हें भी ईन लोगो को ज्वाईन करना है।उमा अब सहम गई उसने अपना मन बदल लिया और फिर उस अंगुठी ताकद से वोह अपने घर वापस लौट गई।

ऐसा तो सबके साथ होता है हम सब हमारी किसी की हवस का शिकार नही बनना चाहते लेकिन कही से ना कहीसे अपनी हवस पुरा करना चाहते है।

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