Preeti and Nandini Sex Stories

न्यू अनुभव चुदाई की कहानी – Part 02


Preeti and Nandini Sex Stories प्रीती और नंदिनी की चुदाई चूत की कहानियाँ

Preeti and Nandini Sex Stories

जाना।जेठानी की बात सुन कर तारा तो जैसे खुसी से झूम गयी पर उसने अपने आव भाव किसी को पता नही चलने दी।मेरा भी हौसला मजबूत हो गया सुन कर और मैंने कहा तारा जल्दी चलो रात होने से पहले वापस आना है।

हम बाहर निकल ही रहे थे तो छोटी देवरानी ने टोका मेरा दिल बैठ स गया।मैंने भगवान को याद करना शुरू कर दिया और पूछा क्या हुआ।देवरानी ने पूछा क्या हम बाज़ार जा रहे?तारा ने जवाब दिया हा थोड़ा पूजा का सामान लेने जाना है।तब देवरानी ने एक पर्ची दी और पैसे और कहा के ये सामान ले आना।मैंने पर्ची देखी तो सृंगार का सामान लिखा था,

मैंने बोला अगर देर नही हुई तो जरूर ला दूंगी।देवरानी ने बड़े प्यार से विनती की के कृपा कर केला देना इधर मिलता नही ये सब जो में इस्तेमाल करती हूं और आपके देवर ध्यान भी नही देते।तभी जेठानी भी बाहर आने लगी तो तारा ने तबाक से जवाब दिया हा सबसे पहले तुम्हारा ही सामान ले लेंगे ताकी जल्दी बाज़ार से निकल सके। जेठानी ने पूछा क्या हुआ गई नही देर करोगी क्या ?देवरानी ने उत्तर दिया के दीदी बाजार जाएगी तो
मैंने भी समान मंगवा लिया उसने साथ ये भी बता दिया के किस जगह आसानी से मिल जाएगी।

हमने समय ज्यादा न बर्बाद कर तुरंत गाड़ी में बैठ निकल आये।तारा स्वयं गाड़ी चला रही थी,मैन उससे पूछा के
माइक और मुनीर कहा है और मिलने की जगह सुरक्षीत तो है?तारा ने तुरंत जवाब दिया फिक्र मत करो इसबार
ऐसी जगह पर सारा इंतेज़ाम है के दिल खुश हो जाएगा और किसी प्रकार का कोई भय नही रहेगा।मैंने कहा पहले देवरानी का सारा सामान ले लेते है और हम बाज़ार चले गए सारा सामान खरीदा।करीब दोपहर के दो बजे गए थे

काफी देर हो चुकी थी इसलिए अब घबराहट भी होने लगी थी।उधर माइक और मुनीर से मिलने की उत्सुकता भी थी और भय भी के आज क्या होगा।तारा ने कहा बस आधे घंटे का रास्ता है परेशान न हो।पता नही उसे इस सेहर का पता इतना ज्यादा कैसे था।बहुत ही भयहीन औरत है तारा,सही मायने में वो आज के युग की महिला थी। करीब 3-4 कीलोमीटर सेहर से बाहर निकल मुख्य सड़क पे आने के बाद उसने एक कच्ची सड़क पकड़ी जो सीधा जंगल के भीतर जा रहा था।मैं और भी ज्यादा भयभीत होने लगी के आखिर ये कहा जा रही थी।थोड़ी दूर और अंदर जाने पे पता चलने लगा के ये राष्ट्रीय उद्यान है और ये पीछे की तरफ ले जा रही थी मुझे।मैन तारा से कहा यहाँ कहा जा रही हो अंदर जंगल के सिवा कुछ नही है।और यहां काफी लोग आते है घूमने तुम मुझे वापस मेरे घर छोड़ दो।तारा ने कहा तुम बहुत डरती हो थोड़ा सब्र कर लो तो बात पता चलेगी।मेरे पास कोई विकल्प नही था। उस कच्ची सड़क से दूर कुछ लोग दिखने लगे थे जो घूमने आए थे।

मुझे बहुत घबराहट होने लगी के कोई पहचान का व्यक्ती न मिल जाये तो मेरी सारी असलियत बाहर आजायेगी।कुछ दूर और चलने पे पूरा सुनसान जंगल और घने पेड़ दिखने लगे।थोड़ी दूर और चल कर एक रास्ता बाड़ के भीतर जाने का दिखा।हम भीतर चले गए तो देखा एक गेस्ट हाउस था।ऐसा दिख रहा था जैसे भूतिया हवेली हो और दूर दूर तक कोई नही था केवल पेड़ो पर बंदर ओर चिड़िया हलचल कर रहे थे।मैंने तारा से पूछा क्या यही जगह है,उसने उत्तर दिया है।में डर गई और बोली मुझे वापस घर ले चलो मुझे डर लग रहा है।उसने मुझे बताया के फिक्र करने की कोई बात नही ये बाहर से ऐसा है भीतर चलो तो असली नज़ारा दिखेगा।तारा ने गाड़ी से उतरने के बाद बताया के ये वन विभाग का गेस्ट हाउस है पर बन्द था।

माइक के एक जानकार ने इसे साफ सफाई करवा कर यहां ठहरने की अनुमती दी है।माइक ने बहुत पैसा खर्च
कर सारा इंतेज़ाम किया है और वन विभाग के चौकीदार को इधर आने से मना किया हुआ है।मैं समझ गयी के
माइक किसी रसूकदार पद पर होगा तभी ये मिला क्योकी बहुत से विदेशी पर्यटक यहां आते तो है पर इतनी
सुविधा सबको नही मिलती।जो भी आते है वो मुख्य द्वार से अंदर आते है और वही के गेस्ट हाउस में रुकते है।

ये गेस्ट हाउस बहुत पुराना था और इस तरफ काफी घाना जंगल था सो किसी के भी इधर आने की बहुत कम
संभावना थी। तारा और मैं बातें करते हुए दरवाजे तक पहुचे,दरवाजा खटखटाया तो मेरी दिल की धड़कन दोगुनी हो गयी।तभी तारा ने अपने पर्स से एक रेडियो निकाला और उसमें अंग्रेजी में कहा हम गए है।उधर से माइक की आवाज थी

उसने कहा ओके।तारा मेरी तरफ देखती हुई बोली यहां मोबाइल काम नही करता सलिये किसी भी मुसीबत में
संपर्क करने का यही तरीका है।तारा की बात खत्म होते ही दरवाजा खुला।और सामने एक पहाड़ से व्यक्ती
मुस्कुराता हुआ हमारा स्वागत कर रहा था।

मैंने जैसा सोचा था ये सब वैसा नही था एक पल के लिए लगा क्या यही माइक है या कोई हुमसकल।करीब 7 फ़ीट का विशालकाय व्यक्ती,गेहुआ रंग,सुडौल कंधे,मजबूत बाजू,चिकनी चमड़ी। में तो केवल उसके पेट तक ही आरही थी।मैंने तारा से पूछा क्या ये ही माइक है इतना लंबा चौड़ा।उसने बताया माइक 6फ़ीट 6इंच का है पर शरीर की सुडौलता के कारण इतना भयानक दिखता है।खैर इतना कहते ही माइक ने बड़े शालीनता से मेरा स्वागत किया और भीतर आने का न्योता दिया।माइक का स्वभाव मुझे बहुत अच्छा लगा,उसने मेरी तरफ करनी शुरू कर दी पर वो ज्यादातर अंग्रेज़ी में बोल रहा था तो तारा मुझे अनुवाद कर बता रही थी।

देखा जाए तो माइक और मुझे एक समानता यह थी कि उसे हिंदी ठीक से आती नही थी और मुझे अंग्रेज़ी
ठीक से नही आती थी।मइके केवल एक शार्ट पैंट में था बाकी पूरा बदन खुला था।हमदोनो बाकी सभी चीजों में
विपरीत थे।उसने मुझे बैठने को कहा और पूछा कुछ पियोगी।तारा ने कहा के ये शराब नही पीती तो उसने मुझे
ठंडा पीने के लिए कहा और एक तरफ जाने लगा।जब वह चल रहा था मेरा ध्यान उसकी पैंट पर गयी,उसका लिंग झूल रहा था पैंट के अंदर में समझ गयी के उसने अंदर कुछ नही पहना और साथ ही अचंभित भी थी के जिसप्रकार लिंग झूल रहा काफी बड़ा लग रहा जब कि वो उत्तेजित भी नही था।

मैंने कमरे को देखा काफी काम करवाया गया था,एक तरफ रसोई घर था जहाँ माइक गया था,हम जहा बैठे थे वहां सोफे रखवाए गए थे हमारे पीछे एक गलियारा था शायद पीछे कुछ कमरे थे।यही सब देखते हुए मैंने तारा से पूछा के मुनीर नही आई है क्या?तारा ने तुरंत जवाब दिया माइक और मुनीर कभी अलग नही राह सकते।मैंने कहा तो वो कहा है,उसने कहा भीतर कमरे में होगी।मैंने कहा तो फिर चलो मिलते है उससे।एक औरत का दूसरी औरत से मिलने में ज्यादा हिचकिचाहट नही होती जैसा के मर्दो से मिलने में होती है।तारा ने कहा हा चलो तबतक माइक एक ठंडा और एक गिलास में मदिरा लेकर गया मदिरा तारा को दिया और ठंडा मुझे।माइक ने कहा मुनीर अंतिम कमरे में है और हम तीनों एक साथ चल पड़े।दरवाजे के सामने पहुचते ही किसी मर्द के कराहने की आवाज सुनाई दी मुझे।

मैंने तारा और माइक की तरफ देखा दोनो मेरी और मुस्कुराते हुए देखने लगे और तारा ने दरवाजा खोला
।भीतर जो नजारा था वो मैंने अपने जीवन मे पहले कभी नही देखा था। एक मर्द अपने घुटनों के बल कुत्तो के तरह बिस्तर पर झुक हुआ था और उसके पीछे मुनीर मर्दो की तरह धक्के मार रही थी।मेरे तो कुछ समझ नही आरहा था के ये आखिर हो क्या रहा।तारा ने मेरी दुविधा को समझ लिया और उसने मेरा हाथ पकड़ कर भीतर खिंचा।

तभी मुनीर ने धक्के मारते हुए मुझे हेलो कहा,और बोली आखिर हम मिल ही गये सुंदरी।वो मर्द भी अपना सिर उठा कर मुझे देख हेलो कहा।मुझे लगा के में इस मर्द को देख चुकी हूं।तारा ने मुझे मुनीर के ठीक सामने ले जाकर खड़ा कर दिया और कहा शौक बड़ी चीज है। …