न्यू अनुभव चुदाई की कहानी – Part 01

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नमस्कार,

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में सारिका कंवल एक नया अनुभव लेकर आपके समक्ष आयी हु।मेरी उम्र अब 47की हो गयी है पर पता नही मेरी रुची कामक्रीड़ा में बहुत रही शुरू से ही।ये कहानी सच्ची अनुभव है जो मेरी दुनिया मे इंटरनेट और सामाजिक बंधनो से बाहर निकल कर जीने का है। मैं अपने पाती के नकारात्मक जीवन शैली से तंग आ चुकी थी उसके लिए केवल अपने मित्र और पैसा जरूरी था।

उसके लिए संभोग केवल बच्चे पैदा करने का साधन था।समय के बदलाव ने मुझे बदल दिया मगर और मेरे पाती वही पौराणिक काल मे जी रहे थे।साल 2015 में मेरे पती ने एक पुराना कंप्यूटर खरीदा था और इंटरनेट भी लगवाया था बच्चो के लिए।पर बच्चे आज के जमाने के है और कंप्यूटर आदम काल का सो वैसा ही पड़ा रहता था ।बाद में बच्चो ने उस डब्बे को हमारे कमरे में उसे रख दिया क्योकी इस्तेमाल करना किसी को पसंद नही था।मेरा तो दिन रात अकेले ही गुजरता था

क्योकी पती धनबाद में रहने लगे थे और कभी कभार घर आते थे।और आये भी तो कभी मन हुआ तो आये मेरे पास और थोड़ा बहुत जो करना हुआ कर बाहर वाले कमरे में जाकर सो जाते।मैं ज्यादातर अकेली रहती थी किताबे और पत्रिका ही मेरी सहेलियां थी।इसी बीच बच्चो ने मुझे हल्के फुल्के कंप्यूटर चलाना सीखा दिया।मैं अपने पती के बराबर ज्यादा शिक्षित हु और मुझे अंग्रेज़ी लिखना और पढ़ना आता था

सो मुझे कोई परेशानी नही हुई।धीरे धीरे मेरा समय कंप्यूटर पर बीतने लगा समय काटने के लिए रात को कभी कोई खेल खेलती तो कभी फ़िल्म देखती।समय के बदलते इंटरनेट का जमाना गया और ऑनलाइन खेलो का चलन आया।धीरे धीरे मैं इंटरनेट पे समय बिताने लगी ।इस बीच कुछ ऐसे साइट्स भी थे जो वयस्क लोगो के लिए था।फिर एक दिन मेरे बेटे ने मेरी एक याहू आईडी बना दी क्योकी वो बाहर जा रहा था

पढ़ने ।उसने कहा के इसमें वो मुझसे वीडियो पर बात कर सकता है।उसके होस्टल जाने के बाद हर रविवार वो मुझे वीडियो पर बाते करता।बाकी के दिनों मैं खाली बैठी रहती।एक रात ऐसे ही मैं याहू पर ऑनलाइन थी तो मेरी नजर एक जगह गयी।वो जगह ऑनलाइन चैटरूम था मैं वहां गयी तो एक के बाद एक संदेश आने लगे मुझे । मुझे कुछ समझ नही आया के क्या हो रहा और मैंने उसे बंद कर दिया। अगली रात फिर मैंने खोला तो उसी प्रकार से संदेश पर संदेश आने शुरू हो गए।

तभी एक संदेश पर एक स्त्री का नाम देख उसे उत्तर दिया।फिर हमारी जान पहचान शुरू हुई और फिर दो घंटे बातें हूई।वो भी एक मेरी ही उम्र की महिला थी और गृहस्तनी थी।धिरे धीरे हम खुल के बातें करने लगे और उसने बताया के अगर वयस्को की तरह समय बिताना चाहती हो तो एक साइट पे चली जाओ।उस साइट का नाम एडल्ट फ्रेंड फाइंडर है और मैं वहां चली गयी ।पहले तो बहुत अटपटा से लगा पर जब मै सदश्य बन गयी तो धीरे धीरे उसके तौर तरीके,नियम और लोगो के बारे में जान गई।

फिर यही से मेरी इंटरनेट से असल वयस्क जीवन शुरू हुई।इस साइट पे मैं 2016 से हु और मेरे बहुत से मित्र बने और कुछ लोगो से मिली भी।ये कहानी एक मेरी इसी साइट से मिली सहेली और एक दंपती की है जिन्हें मैंने ऑनलाइन संभोग करते देखा था।तीनो को संभोग करते देख मेरी भी वासना जग गयी और उसके बाद जो हुआ आगे बताती हु मैं अब।मेरी सहेली का नाम तारा है जो 38 साल की है और दंपती में पुरुष माइक 57 और महिला मुनीर 55 की है ।

उस रात वो लोग संभोग के बाद क्या करने लगे ये तो नही पता पर में सो गई थी।दो दिन तक उनसे बात भी नही हुई थी क्योंकि मैं घर के कामो में उलझ गयी थी।जन्माष्टमी सामने थी सो सब उसी में लगे थे और मैं भी घरवालो के साथ व्यस्त हो गयी थी।दो दिन के बाद मेरे बड़े भाई की लड़की और उसका पती आया सो सब मेहमान नवाजी में लग गए। दोपहर तक मुझे थोड़ा आराम करने का मौका मिला सो मैं अपने कमरे में सोने चली गई।अकेले थी सोची के देखु ऑल्ट साइट पे क्या चल रहा।

मैन तारा और माइक का संदेश देखा माइक ने मुझसे मिलने की इच्छा जताई थी तो वही दूसरी तरफ तारा ने लिखा था के वो मुझसे मिलने आरही है।मैन तारा की बात को मजाक में लेते हुए जवाब दिया के जब मर्ज़ी चली आना।माइक को मैंने जवाब दिया के मुझे सोचने का समय चाहिए मेरे लिए घर से निकल पाना मुश्किल है।कुछ पलों के बाद मुझे संदेश आया के मुनीर ऑनलाइन है और वो भी मुझसे मिलने के लिए वयकुल है।मुनीर ने दोबारा संदेश दिया के उसके घर कोई मेहमान आया है और उसने अपना कैमरा चालू कर मुझे आग्रह किया के देखु।मैंने देखा तो सामने बिस्तर पर एक नीग्रो दम्पति था।

मुनीर ने बताया के वो उनके अमरिकी मित्र है।माइक दफ्तर गया है और वो तीनो ही ही सिर्फ घर पर थे।दोनो मर्द और स्त्री निर्वस्त्र थे और एक दूसरे के साथ आलिंगन कर रहे थे जबकी मुनीर अपने कैमरे के सामने मुझसे बातें कर रही थी।नीग्रो दंपती बहुत ही काले थे,और स्त्री काफी मोटी ओर लंबी चौड़ी वही मर्द का शरीर किसी पेहलवा की तरह था।

मुझे लगा आज फिर कुछ रोचक दृश्य दिखेगा।में बहुत उत्सुक हो गयी तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया मैंने तुरंत मोबाइल बन्द कर दिया और दरवाजा खोला तो देखी के हमारा नाती (बड़े भाई साहब की लड़की का बेटा) जो के 2साल का है खड़ा था।मैंने उसे गोद मे उठाया और प्यार करने लगी।मेरे दिमाग से सब अब निकल चुका था और पीछे से हमारी भतीजी भी गयी तो हमदोनो कमरे में जाकर बात चीत करने लगे।दिन बस ऐसे ही निकल गया दोबारा मोबाइल पर धयान नही गया।

अगले दिन माइक का फिर से संदेश आया और उसने मुझे पूछा के क्या हम मिल सकते है।मैंने सोचा तो नही था
कभी के ऐसा हो सकता है।पर बार बार माइक और मुनीर द्वरा पूछने पर अब मेरे दिल मे हलचल सी होने लगी।अंदर से डर भी लगने लगा ।दिन भर मेरे दिमाग मे बस यही बात चलती रही के क्या जवाब दु।रात हुई तो तारा का भी संदेश आया के चलो पिछली बार की तरह फिर से कुछ किया जाए।मैंने सीधा उत्तर दिया के मेरी विडंबना वो जानती है

मैं जल्दी बाहर नही जा सकती।उसपर उसने कहा के पिछली बार की तरह ही वो मुझे बाहर निकाल लेगी।मुझे थोड़ा यकीन आया क्योकि मेरे घरवाले तारा से मिल चुके है तो बाहर जाने से मना नही करेंगे।पर अब ये सोचने लगी के बहाना क्या बनाउंगी।मैंने शांलिनी को कहा के मैं सोच कर बताऊंगी।

तबतक मुनीर का भी संदेश गया और पूछी के कब मिलने का सोचा है।पता नही क्यो मेरे अंदर से बात निकल गयी औरमैन उसे उत्तर दे दिया के सोच कर बताऊंगी।अगले दोपहर मैंने तारा को संदेश भेजा के किसके साथ मुझेमिलवाना चाहती है।उसने उत्तर दिया माइक ओर मुनीर से।मै समझ गयी ये तीनो मिलकर ही साथ मे योजनाबना रहे थे।फिर मैंने पूछा के कहा मिलने की योजना है।तारा ने उत्तर दिया के मैं परेशान न होऊ माइक साराइंतेज़ाम कर लेगा और सुरक्षित जगह पर ही मिलेंगे और दिन में ही मिलेंगे ताकी मेरे घरवालों को कोई आपत्ती न हो।उसकी बातें सुन कर भरोसा हुआ।पर जब उसने कहा के कब मिलना है तो मैं सोच में पड़ गयी।मैंने कहा सोच कर बताऊंगी।

अब मैं ये सोचने लगी के आखिर ये सब होगा कैसे वो लोग तो मुक्त थे पर मेरी अपनी परेशानियां थी। दिन भर सोचने के बाद मैंने तय किया के उनको माना कर दूंगी।पर रात को सोचते सोचते पता नही अचानक मैंने निश्चय
कर लिया के मिलूंगी।शायद ये मेरे अंदर की वासना थी जो जागृत हो गयी थी।कैसे मिलु कैसे मिलु सोचते सोचते
मुझे खयाल आया के जन्मास्टमी के दिन कोई बहाना बना कर निकाल सकती हूं दिनभर के लिए।करीब 2 बजे
रात को मैन तारा को संदेश भेज सारा बता दिया और सो गई।अगले दोपहर मेरे पास संदेश आया के सब तैयार है

और तारा मुझे अपने साथ दिनभर के लिए ले जाएगी।मुझे पूरी तरह से यकीन नही था और अंदर से डर भी लग रहा था।बस एक हफ्ते की बात थी पर मेरे मन बहुत बैचैन हो रहा था तरह तरह के ख्याल मैन में आ रहे थे।कभी
घरवालो का डर होता तो मनोबल टूटने लगता तो कभी माइक का खयाल से डर क्योकि मैं उससे पहले कभी मिली नही थी और न ही वो हमारी प्रजाती से था।मैं खुद नही बता सकती के मेरे भीतर क्या चल रहा था।मैंने अपनी सारी व्यथा उन तीनों से कहनी शुरू की उन्होंने मेरा हौसला बढ़ना शुरू किया पर मेरी स्तिथी मुझे बेहतर कोई नही जानता था।

इन्ही खयालो बातो से एक हफ्ता बीतने को हो गया और जन्मास्टमी से एक दिन पहले उन्होंने मुझे एक संदेश भेजा के वो मेरे सेहर के पास आ गए है।मेरे तो जैसे होश ही उड़ गए दिनभर सोचते हुए रात मैंने उन्हें मिलने से मना कर दिया।तारा पूरी तरह से नाराज हो गयी।तारा ने मुझसे कहा के वो सब इतनी दूर से आये है पैसा खर्च किया और अब मैं नाटक करने लगी।उसने करीब 2 बजे रात तक मुझे मनाया फिर मैं भी उनकी बातें सुन मां गयी।रात बहुत देर से नींद आयी।पर सुबह जल्दी खुल गयी।10बजे तारा मेरे घर पहुच गयी मेरे घरवालो को कुछ हैरानी नही हुई क्योकि सभी तारा से मिल चुके थे।जब मैंने कहा के में उसके साथ उसके घर जा रही तो बड़ी जेठानी ने केवल इतना कहा के ज्यादा रात मत करना और अगर देर हूई तो अगले सुबह जल्दी आ जाना।

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